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mahabharat 6.10.12: द्वापर युग में सभी जातियों के लोग जन्म लेते हैं और वे सदैव अत्यंत उत्साही, साहसी और एक-दूसरे पर विजय पाने के लिए आतुर रहते हैं ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 6.10: भारतवर्षमें युगोंके अनुसार मनुष्योंकी आयु तथा गुणोंका निरूपण   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 10: भारतवर्षमें युगोंके अनुसार मनुष्योंकी आयु तथा गुणोंका निरूपण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  6.10.12 
सर्ववर्णाश्च जायन्ते सदा चैव च द्वापरे।
महोत्साहा वीर्यवन्त: परस्परजयैषिण:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
द्वापर युग में सभी जातियों के लोग जन्म लेते हैं और वे सदैव अत्यंत उत्साही, साहसी और एक-दूसरे पर विजय पाने के लिए आतुर रहते हैं ॥12॥
 
In Dvapara Yuga, people of all castes are born and they are always very enthusiastic, courageous and eager to conquer one another. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)