| श्री महाभारत » पर्व 6: भीष्म पर्व » अध्याय 10: भारतवर्षमें युगोंके अनुसार मनुष्योंकी आयु तथा गुणोंका निरूपण » श्लोक 10-11 |
|
| | | | श्लोक 6.10.10-11  | महोत्साहा महात्मानो धार्मिका: सत्यवादिन:।
प्रियदर्शना वपुष्मन्तो महावीर्या धनुर्धरा:॥ १०॥
वरार्हा युधि जायन्ते क्षत्रिया: शूरसत्तमा:।
त्रेतायां क्षत्रिया राजन् सर्वे वै चक्रवर्तिन:॥ ११॥ | | | | | | अनुवाद | | राजन! इसी प्रकार त्रेतायुग में सम्पूर्ण जगत् के क्षत्रिय बड़े ही उत्साही, महामनस्वी, धार्मिक, सत्यवादी, प्रेममय, सुन्दर शरीर वाले, पराक्रमी, धनुर्धर, वर पाने के योग्य, युद्ध में वीर और मनुष्यों की रक्षा करने वाले होते हैं॥10-11॥ | | | | Rajan! Similarly, in Treta Yuga, the Kshatriyas of the whole world are very enthusiastic, great-minded, religious, truthful, loving, beautiful body, mighty, archers, worthy of getting a groom, brave in battle and protectors of humans. 10-11॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|