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mahabharat 6.1.4: वे सभी वेदों का अध्ययन करने वाले तथा युद्धप्रिय होने के कारण युद्ध में विजय की आशा से पूरी शक्ति के साथ युद्धभूमि में एक-दूसरे के सामने खड़े थे।   |   mahabharat अध्याय 6.1: कुरुक्षेत्रमें उभय पक्षके सैनिकोंकी स्थिति तथा युद्धके नियमोंका निर्माण   ।   mahabharat पर्व 6: भीष्म पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 1: कुरुक्षेत्रमें उभय पक्षके सैनिकोंकी स्थिति तथा युद्धके नियमोंका निर्माण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  6.1.4 
वेदाध्ययनसम्पन्ना: सर्वे युद्धाभिनन्दिन:।
आशंसन्तो जयं युद्धे बलेनाभिमुखा रणे॥ ४॥
 
 
अनुवाद
वे सभी वेदों का अध्ययन करने वाले तथा युद्धप्रिय होने के कारण युद्ध में विजय की आशा से पूरी शक्ति के साथ युद्धभूमि में एक-दूसरे के सामने खड़े थे।
 
All of them, having studied the Vedas and being war-loving, were standing facing each other on the battle-field with full strength, hoping to win the battle.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)