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एकेन सह संयुक्त: प्रपन्नो विमुखस्तथा।
क्षीणशस्त्रो विवर्मा च न हन्तव्य: कदाचन॥ ३१॥
अनुवाद
जो मनुष्य किसी दूसरे के साथ युद्ध में लगा हुआ हो, शरण ले चुका हो, पीठ फेरकर भाग गया हो तथा जिसके हथियार और कवच कट गए हों, उसे कभी नहीं मारना चाहिए। 31.
A person who is engaged in a battle with another, has sought refuge, has turned his back and has run away and whose weapons and armour have been cut off should never be killed. 31.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥