श्री महाभारत  »  पर्व 6: भीष्म पर्व  »  अध्याय 1: कुरुक्षेत्रमें उभय पक्षके सैनिकोंकी स्थिति तथा युद्धके नियमोंका निर्माण  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.1.31 
एकेन सह संयुक्त: प्रपन्नो विमुखस्तथा।
क्षीणशस्त्रो विवर्मा च न हन्तव्य: कदाचन॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य किसी दूसरे के साथ युद्ध में लगा हुआ हो, शरण ले चुका हो, पीठ फेरकर भाग गया हो तथा जिसके हथियार और कवच कट गए हों, उसे कभी नहीं मारना चाहिए। 31.
 
A person who is engaged in a battle with another, has sought refuge, has turned his back and has run away and whose weapons and armour have been cut off should never be killed. 31.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)