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mahabharat 5.99.9: मातले! ये पातालवासी प्राणी दिन में सूर्य की किरणों से तंग आकर मृतप्राय अवस्था को पहुँच जाते हैं; किन्तु रात्रि होने पर अमृतमय चन्द्रमा के प्रकाश के सम्पर्क में आकर पुनः जीवित हो उठते हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 5.99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  5.99.9 
अत्र सूर्यांशुभिर्भिन्ना: पातालतलमाश्रिता:।
मृता हि दिवसे सूत पुनर्जीवन्ति वै निशि॥ ९॥
 
 
अनुवाद
मातले! ये पातालवासी प्राणी दिन में सूर्य की किरणों से तंग आकर मृतप्राय अवस्था को पहुँच जाते हैं; किन्तु रात्रि होने पर अमृतमय चन्द्रमा के प्रकाश के सम्पर्क में आकर पुनः जीवित हो उठते हैं॥9॥
 
Matale! These underworld-dwelling creatures get fed up with the sun's rays during the day and reach a near-dead state; But when night falls, they come alive again in contact with the nectar-filled moonlight. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)