श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.99.4 
अत्रामृतं सुरै: पीत्वा निहितं निहतारिभि:।
अत: सोमस्य हानिश्च वृद्धिश्चैव प्रदृश्यते॥ ४॥
 
 
अनुवाद
देवताओं ने अपने शत्रुओं को मारकर अमृत पी लिया था और शेष भाग यहीं छोड़ दिया था। इसीलिए अमृतरूपी सोम की हानि और वृद्धि देखी जाती है ॥4॥
 
The gods had killed their enemies and drank the nectar and left the remaining portion here. That is why the loss and increase of the nectar-like Soma is observed. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)