श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.99.3 
अत्रासुरोऽग्नि: सततं दीप्यते वारिभोजन:।
व्यापारेण धृतात्मानं निबद्धं समबुध्यत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यहाँ जल से पोषित होने वाली राक्षसी अग्नि सदैव प्रज्वलित रहती है। उसे सावधानी से सीमा में रखा गया है। वह अग्नि अपने को देवताओं द्वारा नियंत्रित समझती है, इसलिए वह सर्वत्र फैल नहीं पाती॥3॥
 
Here the demon fire which feeds on water is always aflame. It has been carefully kept within limits. That fire thinks itself to be controlled by the gods; therefore it is unable to spread everywhere.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)