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mahabharat 5.99.20: नारदजी की यह बात सुनकर मातलि बोले, "यहाँ का कोई भी वर मुझे पसंद नहीं है; अतः आप शीघ्र ही अन्यत्र चले जाइये।"   |   mahabharat अध्याय 5.99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.99.20 
मातलिस्त्वब्रवीच्छ्रुत्वा नारदस्याथ भाषितम्।
न मेऽत्र रोचते कश्चिदन्यतो व्रज माचिरम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
नारदजी की यह बात सुनकर मातलि बोले, "यहाँ का कोई भी वर मुझे पसंद नहीं है; अतः आप शीघ्र ही अन्यत्र चले जाइये।"
 
Hearing this speech of Narada, Matali said, "I do not like any of the grooms here; therefore, please go somewhere else soon."
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि मातलिवरान्वेषणे एकोनशततमोऽध्याय:॥ ९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें मातलिके द्वारा वरका खोजविषयक निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)