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मातलिस्त्वब्रवीच्छ्रुत्वा नारदस्याथ भाषितम्।
न मेऽत्र रोचते कश्चिदन्यतो व्रज माचिरम्॥ २०॥
अनुवाद
नारदजी की यह बात सुनकर मातलि बोले, "यहाँ का कोई भी वर मुझे पसंद नहीं है; अतः आप शीघ्र ही अन्यत्र चले जाइये।"
Hearing this speech of Narada, Matali said, "I do not like any of the grooms here; therefore, please go somewhere else soon."
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि मातलिवरान्वेषणे एकोनशततमोऽध्याय:॥ ९९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें मातलिके द्वारा वरका खोजविषयक निन्यानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९९॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥