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mahabharat 5.99.17: जल के अन्दर एक अण्डा पड़ा है, जो अपनी ही चमक से यहाँ चमक रहा है। जब से मनुष्यों की सृष्टि हुई है, तब से यह अण्डा न तो कभी टूटा है और न ही अपने स्थान से हिला है॥17॥   |   mahabharat अध्याय 5.99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.99.17 
अण्डमेतज्जले न्यस्तं दीप्यमानमिव श्रिया।
आ प्रजानां निसर्गाद् वै नोद्भिद्यति न सर्पति॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जल के अन्दर एक अण्डा पड़ा है, जो अपनी ही चमक से यहाँ चमक रहा है। जब से मनुष्यों की सृष्टि हुई है, तब से यह अण्डा न तो कभी टूटा है और न ही अपने स्थान से हिला है॥17॥
 
There is an egg lying inside the water, which is shining here with its own radiance. Since the creation of humans began, this egg has neither broken nor moved from its place.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)