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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 99: नारदजीके द्वारा पाताललोकका प्रदर्शन
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श्लोक 10
श्लोक
5.99.10
उदयन् नित्यशश्चात्र चन्द्रमा रश्मिबाहुभि:।
अमृतं स्पृश्य संस्पर्शात् संजीवयति देहिन:॥ १०॥
अनुवाद
वहाँ प्रतिदिन उदय होने वाला चन्द्रमा अपनी किरणों से युक्त भुजाओं से अमृत का स्पर्श करके वहाँ मरने वाले प्राणियों को इस लोक में जीवित कर देता है ॥10॥
The moon, which rises there every day, makes the dying creatures there live in this world by touching the nectar with its ray-filled arms. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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