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mahabharat 5.98.3: मार्ग में जाते समय जब नारदजी ने यह पूछा तो मातलि ने अपना सारा कार्य उन्हें यथावत बता दिया।   |   mahabharat अध्याय 5.98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.98.3 
मातलिर्नारदेनैवं सम्पृष्ट: पथि गच्छता।
यथावत् सर्वमाचष्ट स्वकार्यं नारदं प्रति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
मार्ग में जाते समय जब नारदजी ने यह पूछा तो मातलि ने अपना सारा कार्य उन्हें यथावत बता दिया।
 
While going on the way, when Naradji asked this, Matali told him all her work exactly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)