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mahabharat 5.98.25: हे मातले! वरुणलोक में देखने योग्य बहुत सी अद्भुत वस्तुएँ हैं; परंतु उन सबको देखने से तुम्हारे कार्य में बाधा होगी, इसलिए चलो हम शीघ्र ही यहाँ से निकलकर नागलोक को चलें॥ 25॥   |   mahabharat अध्याय 5.98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.98.25 
बहून्यद्‍भुतरूपाणि द्रष्टव्यानीह मातले।
तव कार्यावरोधस्तु तस्माद् गच्छाव मा चिरम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे मातले! वरुणलोक में देखने योग्य बहुत सी अद्भुत वस्तुएँ हैं; परंतु उन सबको देखने से तुम्हारे कार्य में बाधा होगी, इसलिए चलो हम शीघ्र ही यहाँ से निकलकर नागलोक को चलें॥ 25॥
 
O Matale! There are many wonderful things to see in Varunalok; but seeing them all will hinder your work, so let us quickly leave from here and go to Nagaloka. ॥ 25॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि मातलिवरान्वेषणे अष्टनवतितमोऽध्याय:॥ ९८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें मातलिके द्वारा वरका खोजविषयक अट्ठानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९८॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)