श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.98.24 
एतच्छत्रात् परिभ्रष्टं सलिलं सोमनिर्मलम्।
तमसा मूर्छितं भाति येन नार्च्छति दर्शनम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस छत्र से गिरने वाला चन्द्रमा के समान निर्मल जल अंधकार से ढका रहता है, जिससे वह दिखाई नहीं देता ॥24॥
 
The moon-like clear water falling from this umbrella remains covered by darkness, which makes it invisible to sight. ॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)