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mahabharat 5.98.22: यह धनुष राजाओं के लिए एक महान अस्त्र है और चक्र के समान चमकता है। यह महान शुभ धनुष जलेश के पुत्र वरुण के पास है।   |   mahabharat अध्याय 5.98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.98.22 
एतच्छस्त्रं नरेन्द्राणां महच्चक्रेण भासितम्।
पुत्रा: सलिलराजस्य धारयन्ति महोदयम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
यह धनुष राजाओं के लिए एक महान अस्त्र है और चक्र के समान चमकता है। यह महान शुभ धनुष जलेश के पुत्र वरुण के पास है।
 
This bow is a great weapon for kings and shines like a chakra. This great auspicious bow is held by the son of Jalesh Varuna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)