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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना
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श्लोक 17
श्लोक
5.98.17
अत्र राक्षसजात्यश्च दैत्यजात्यश्च मातले।
दिव्यप्रहरणाश्चासन् पूर्वदैवतनिर्मिता:॥ १७॥
अनुवाद
हे मातले! इन स्थानों पर राक्षस और राक्षस कुल के लोग रहते हैं। यहाँ राक्षसों द्वारा बनाए गए अनेक दिव्यास्त्र हैं ॥17॥
O Matale! Demons and people of the demon clan live in these places. There are many divine weapons made by the demons here. ॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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