श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 98: मातलिका अपनी पुत्रीके लिये वर खोजनेके निमित्त नारदजीके साथ वरुणलोकमें भ्रमण करते हुए अनेक आश्चर्यजनक वस्तुएँ देखना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.98.10 
नारद उवाच
दृष्टस्ते वरुण: सूत पुत्रपौत्रसमावृत:।
पश्योदकपते: स्थानं सर्वतोभद्रमृद्धिमत्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
नारदजी बोले- सूत! तुमने वरुणदेवता को पुत्र-पौत्रों से घिरे हुए देखा है। देखो, यह जलेश्वर वरुण का समृद्ध धाम है। इसका नाम सर्वतोभद्र है।
 
Naradji said- Suta! You have seen Varundevta surrounded by sons and grandsons. Look, this is the prosperous abode of Jaleshwar Varun. Its name is Sarvatobhadra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)