श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.97.7 
भूयिष्ठेन तु राजान: श्रियं भुक्त्वाऽऽयुष: क्षये।
तरुणा: प्रतिपद्यन्ते भोक्तुं सुकृतदुष्कृते॥ ७॥
 
 
अनुवाद
प्रायः राजा लोग भी राजसी धन-संपत्ति भोगने के बाद, मृत्यु के पश्चात् अपने अच्छे-बुरे कर्मों का फल भोगने के लिए पुनः जन्म लेते हैं ॥7॥
 
Often even kings, after enjoying the royal wealth and at the end of their lives after death, take birth again to reap the fruits of their good and bad deeds. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)