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mahabharat 5.97.4: अन्य सभी लोग किसी न किसी कारण से मरते हैं। चन्द्रमा, सूर्य, पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, ग्रह और तारे - ये सभी नाशवान हैं। 4॥   |   mahabharat अध्याय 5.97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.97.4 
निमित्तमरणाश्चान्ये चन्द्रसूर्यौ मही जलम्।
वायुरग्निस्तथाऽऽकाशं ग्रहास्तारागणास्तथा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
अन्य सभी लोग किसी न किसी कारण से मरते हैं। चन्द्रमा, सूर्य, पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश, ग्रह और तारे - ये सभी नाशवान हैं। 4॥
 
All other people die for some reason or the other. Moon, Sun, Earth, Water, Air, Fire, Sky, Planets and Stars – all these are perishable. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)