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इत्यामन्त्र्य सुधर्मां स कृत्वा चाभिप्रदक्षिणम्।
कन्यां शिरस्युपाघ्राय प्रविवेश महीतलम्॥ २१॥
अनुवाद
सुधर्मा से यह सलाह लेकर मातलि ने अपने इष्ट देवता की परिक्रमा की और कन्या का सिर सूंघकर रसातल में प्रवेश किया।
After taking this advice from Sudharmā, Mātali circumambulated his favourite deity and after smelling the girl's head entered the abyss.
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि मातलिवरान्वेषणे सप्तनवतितमोऽध्याय:॥ ९७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें मातलिके वर खोजनेसे सम्बन्ध रखनेवाला सत्तानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥