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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना
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श्लोक 2
श्लोक
5.97.2
कण्व उवाच
अक्षयश्चाव्ययश्चैव ब्रह्मा लोकपितामह:।
तथैव भगवन्तौ तौ नरनारायणावृषी॥ २॥
अनुवाद
कण्व बोले - राजन् ! जिस प्रकार लोकपितामह ब्रह्मा अक्षय और अविनाशी हैं, उसी प्रकार भगवान नर और नारायण दोनों भी ऋषि हैं ॥2॥
Kanva said – King! Just as Lokpitamah Brahma is inexhaustible and imperishable, in the same way both Lord Nara and Narayana are also sages. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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