श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 97: कण्व मुनिका दुर्योधनको संधिके लिये समझाते हुए मातलिका उपाख्यान आरम्भ करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.97.1 
वैशम्पायन उवाच
जामदग्न्यवच: श्रुत्वा कण्वोऽपि भगवानृषि:।
दुर्योधनमिदं वाक्यमब्रवीत् कुरुसंसदि॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- जनमेजय! जमदग्नि पुत्र परशुराम की ये बातें सुनकर भगवान कण्व मुनि ने भी कौरव सभा में दुर्योधन से यही बात कही।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! On hearing these words of Jamadagni's son Parashurama, Lord Kanva Muni also said the same thing to Duryodhana in the Kaurava assembly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)