श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.96.7 
अस्ति कश्चिद् विशिष्टो वा मद्विधो वा भवेद् युधि।
शूद्रो वैश्य: क्षत्रियो वा ब्राह्मणो वापि शस्त्रभृत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
क्या इस संसार में कोई भी शस्त्रधारी शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय या ब्राह्मण है जो युद्ध में मुझसे आगे निकल सके अथवा मेरे बराबर हो सके?॥7॥
 
‘Is there any armed Shudra, Vaishya, Kshatriya or Brahmin in this world who can surpass me or even be equal to me in battle?॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)