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mahabharat 5.96.46: राजन! जिन भगवान ने सम्पूर्ण जगत् को उत्पन्न किया है और जिनके मित्र समस्त कर्मों के ज्ञाता नारायण हैं, वे मनुष्यरूपी अर्जुन युद्ध में दुःखी हैं (क्योंकि उन्हें उपर्युक्त समस्त अस्त्र-शस्त्रों का अच्छा ज्ञान है)॥46॥   |   mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.96.46 
निर्माता सर्वलोकानामीश्वर: सर्वकर्मवित्।
यस्य नारायणो बन्धुरर्जुनो दु:सहो युधि॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
राजन! जिन भगवान ने सम्पूर्ण जगत् को उत्पन्न किया है और जिनके मित्र समस्त कर्मों के ज्ञाता नारायण हैं, वे मनुष्यरूपी अर्जुन युद्ध में दुःखी हैं (क्योंकि उन्हें उपर्युक्त समस्त अस्त्र-शस्त्रों का अच्छा ज्ञान है)॥46॥
 
Rajan! The God who created the entire world and whose friend is Narayana, the knower of all actions, Arjun in the form of a human being is distressed in the war (because he has good knowledge of all the above mentioned weapons). 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)