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mahabharat 5.96.44-45: इन अस्त्रों के प्रयोग से कुछ लोग उन्मत्त होकर एक ही प्रकार की क्रियाएँ करने लगते हैं। कुछ अपनी सुध-बुध खोकर मूर्छित हो जाते हैं। बहुत से लोग सोने लगते हैं। कुछ उछलने-कूदने और छींकने लगते हैं। बहुत से लोग मल-मूत्र त्यागने लगते हैं और कुछ लोग निरन्तर रोते-हँसते रहते हैं।॥44-45॥   |   mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 44-45
 
 
श्लोक  5.96.44-45 
उन्मत्ताश्च विचेष्टन्ते नष्टसंज्ञा विचेतस:॥ ४४॥
स्वपन्ति च प्लवन्ते च छर्दयन्ति च मानवा:।
मूत्रयन्ते च सततं रुदन्ति च हसन्ति च॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
इन अस्त्रों के प्रयोग से कुछ लोग उन्मत्त होकर एक ही प्रकार की क्रियाएँ करने लगते हैं। कुछ अपनी सुध-बुध खोकर मूर्छित हो जाते हैं। बहुत से लोग सोने लगते हैं। कुछ उछलने-कूदने और छींकने लगते हैं। बहुत से लोग मल-मूत्र त्यागने लगते हैं और कुछ लोग निरन्तर रोते-हँसते रहते हैं।॥44-45॥
 
Due to the use of these weapons some people become mad and start doing similar activities. Some lose their senses and fall unconscious. Many people start sleeping. Some jump around and sneeze. Many start urinating and defecating and some people keep crying and laughing continuously.॥ 44-45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)