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mahabharat 5.96.43-44h: इन अस्त्रों से आहत होकर सभी मनुष्य मर जाते हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मद, मोह और अहंकार ये क्रमशः आठ विकार हैं, जिनके प्रतीक उपर्युक्त आठ अस्त्र हैं। 43 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  5.96.43-44h 
एतैर्विद्धा: सर्व एव मरणं यान्ति मानवा:।
कामक्रोधौ लोभमोहौ मदमानौ तथैव च॥ ४३॥
मात्सर्याहंकृती चैव क्रमादेव उदाहृता:।
 
 
अनुवाद
इन अस्त्रों से आहत होकर सभी मनुष्य मर जाते हैं। काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मद, मोह और अहंकार ये क्रमशः आठ विकार हैं, जिनके प्रतीक उपर्युक्त आठ अस्त्र हैं। 43 1/2॥
 
All humans die when hit by these weapons. Lust, anger, greed, attachment, pride, pride, attachment and ego are the eight vices respectively, symbolized by the above mentioned eight weapons. 43 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)