श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.96.42 
काकुदीकं शुकं नाकमक्षिसंतर्जनं तथा।
संतानं नर्तकं घोरमास्यमोदकमष्टमम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
ककुदिक (प्रसव), शुक (मोहन), नक (परमानंद), अक्षिसन्तर्जन (त्रासन), संतान (दैवत), नर्तक (पैशाच), घोर (राक्षस) और अस्यमोदक (यम्य)*- ये आठ प्रकार के हथियार हैं। 42॥
 
Kakudik (childbirth), Shuka (mohan), Nak (ecstasy), Akshisantarjan (trasan), Santana (daivat), Nartaka (paishach), Ghor (demon) and Asyamodak (yamya)*—these are eight types of weapons. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)