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mahabharat 5.96.41: इसलिए हे राजन! जब तक दिव्यास्त्रों का लक्ष्य महान् गाण्डीव धनुष पर न हो जाए, तब तक तुम्हें अपना अभिमान त्यागकर अर्जुन से मिल जाना चाहिए ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.96.41 
तस्माद् यावद् धनु:श्रेष्ठे गाण्डीवेऽस्त्रं न युज्यते।
तावत् त्वं मानमुत्सृज्य गच्छ राजन् धनंजयम्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
इसलिए हे राजन! जब तक दिव्यास्त्रों का लक्ष्य महान् गाण्डीव धनुष पर न हो जाए, तब तक तुम्हें अपना अभिमान त्यागकर अर्जुन से मिल जाना चाहिए ॥ 41॥
 
Therefore, O King, until the divine weapons are not aimed at the great bow of Gandiva, you should give up your pride and meet Arjun. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)