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mahabharat 5.96.35-36h: राजा! आज से कभी भी अहंकार में आकर किसी राजा की निन्दा मत करना, चाहे वह तुमसे बड़ा हो या छोटा। मैंने तुम्हें इस बारे में पहले ही चेतावनी दे दी है।'   |   mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.96.35-36h 
मा च दर्पसमाविष्ट: क्षेप्सी: कांश्चित् कथंचन॥ ३५॥
अल्पीयांसं विशिष्टं वा तत् ते राजन् समाहितम्।
 
 
अनुवाद
राजा! आज से कभी भी अहंकार में आकर किसी राजा की निन्दा मत करना, चाहे वह तुमसे बड़ा हो या छोटा। मैंने तुम्हें इस बारे में पहले ही चेतावनी दे दी है।'
 
‘King! From today onwards, never again be arrogant and criticize any king, whether he is elder or younger than you. I have warned you about this.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)