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तेषामक्षीणि कर्णांश्च नासिकाश्चैव मायया॥ ३१॥
निमित्तवेधी स मुनिरिषीकाभि: समार्पयत्।
अनुवाद
इस प्रकार लक्ष्य पर निशाना साधते हुए ऋषि ने माया से बने सरकण्डों से बने बाणों से दम्भोद्भव के सैनिकों की आँखें, कान और नासिकाएँ छेद दीं।
In this manner, the sage, who was aiming at the target, pierced the eyes, ears and nostrils of Dambhodbhava's soldiers with arrows made of reeds made of Maya. 31 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥