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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  5.96.29-30h 
तस्य तानस्यतो घोरानिषून् परतनुच्छिद:॥ २९॥
कदर्थीकृत्य स मुनिरिषीकाभि: समार्पयत्।
 
 
अनुवाद
उनके भयंकर बाण शत्रु के शरीर को टुकड़े-टुकड़े कर देने में समर्थ थे; किन्तु ऋषि ने उन बाणों को चलाने वाले दमोद्भव की परवाह न करके उसे ही काँटों से बींध डाला।
 
His fierce arrows were capable of tearing the enemy's body into pieces; but the sage did not care about Damhodbhava who was throwing those arrows and pierced him with the thorns only.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)