Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.96.24-25h: परशुरामजी कहते हैं- हे भारत! उन दोनों महात्माओं ने बार-बार ऐसा कहा और राजा से क्षमा मांगी तथा उन्हें अनेक प्रकार से सान्त्वना दी। किन्तु युद्ध की इच्छा से दम्भोद्भव उन दोनों तापसों को बार-बार बुलाता और ललकारता रहा। 24 1/2॥ | mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परशुरामजी कहते हैं- हे भारत! उन दोनों महात्माओं ने बार-बार ऐसा कहा और राजा से क्षमा मांगी तथा उन्हें अनेक प्रकार से सान्त्वना दी। किन्तु युद्ध की इच्छा से दम्भोद्भव उन दोनों तापसों को बार-बार बुलाता और ललकारता रहा। 24 1/2॥
Parshuramji says- India! Those two Mahatmas repeatedly said this and asked for forgiveness from the king and consoled him in various ways. However, with the desire for war, Dambhodbhava kept calling and challenging those two tapasyas. 24 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥