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श्लोक  5.96.2 
कश्चिदुत्तरमेतेषां वक्तुं नोत्सहते पुमान्।
इति सर्वे मनोभिस्ते चिन्तयन्ति स्म पार्थिवा:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे सभी राजा अपने मन में सोचने लगे कि कोई भी मनुष्य प्रभु के इन वचनों का उत्तर नहीं दे सकता।
 
All those kings began to think in their hearts that no human being can answer these words of the Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)