श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  5.96.19-20 
अभिगम्योपसंगृह्य पर्यपृच्छदनामयम्।
तमर्चित्वा मूलफलैरासनेनोदकेन च॥ १९॥
न्यमन्त्रयेतां राजानं किं कार्यं क्रियतामिति।
ततस्तामानुपूर्वीं स पुनरेवान्वकीर्तयत्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
दम्भोद्भव ने उनके चरणों में प्रणाम करके उनका कुशलक्षेम पूछा। तब नर और नारायण ने राजा का स्वागत किया और उन्हें आसन, जल, फल-मूल देकर भोजन के लिए आमंत्रित किया। तत्पश्चात् उन्होंने पूछा कि हम आपकी क्या सेवा कर सकते हैं? यह सुनकर उन्होंने अपना सारा वृत्तांत पुनः शब्दशः कह सुनाया॥19-20॥
 
Going near and saluting at their feet, Dambhodbhava asked about their well-being. Then Nara and Narayan welcomed the king and offered him a seat, water and fruits and roots and invited him for food. Thereafter they asked him what service can we offer to you? On hearing this he narrated his entire story again verbatim.॥ 19-20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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