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mahabharat 5.96.16: राजा को यह सहन न हुआ। उसने छः अंगों (रथ, हाथी, घोड़े, पैदल, गाड़ी और ऊँट) की एक विशाल सेना तैयार की और उस स्थान पर गया जहाँ वे दोनों महात्मा, जो कभी पराजित नहीं हुए थे, उपस्थित थे॥ 16॥   |   mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.96.16 
स राजा महतीं सेनां योजयित्वा षडङ्गिनीम्।
अमृष्यमाण: सम्प्रायाद् यत्र तावपराजितौ॥ १६॥
 
 
अनुवाद
राजा को यह सहन न हुआ। उसने छः अंगों (रथ, हाथी, घोड़े, पैदल, गाड़ी और ऊँट) की एक विशाल सेना तैयार की और उस स्थान पर गया जहाँ वे दोनों महात्मा, जो कभी पराजित नहीं हुए थे, उपस्थित थे॥ 16॥
 
The king could not tolerate this. He equipped a huge army consisting of six parts (chariots, elephants, horses, infantry, carts and camels) and travelled to the place where those two great souls, who were never defeated, were present.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)