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mahabharat 5.96.15: मैंने सुना है कि नर और नारायण नामक दो महात्मा गन्धमादन पर्वत पर ऐसी घोर तपस्या कर रहे हैं कि उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता॥15॥   |   mahabharat अध्याय 5.96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.96.15 
श्रूयेते तौ महात्मानौ नरनारायणावुभौ।
तपो घोरमनिर्देश्यं तप्येते गन्धमादने॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मैंने सुना है कि नर और नारायण नामक दो महात्मा गन्धमादन पर्वत पर ऐसी घोर तपस्या कर रहे हैं कि उसका वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता॥15॥
 
I have heard that the two great souls, Nara and Narayana, are performing such severe penance on the Gandhamadana mountain that words cannot describe it.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)