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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 96: परशुरामजीका दम्भोद्भवकी कथाद्वारा नर-नारायणस्वरूप अर्जुन और श्रीकृष्णका महत्त्व वर्णन करना
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श्लोक 12
श्लोक
5.96.12
अनेकजयिनौ संख्ये यौ वै पुरुषसत्तमौ।
तयोस्त्वं न समो राजन् भवितासि कदाचन॥ १२॥
अनुवाद
‘राजन्! ऐसे दो महापुरुष हैं, जिन्होंने युद्ध में अनेक योद्धाओं को जीत लिया है। तुम कभी भी उनके समान नहीं हो सकोगे।’॥12॥
‘King! There are two such great men who have conquered many warriors in the war. You will never be able to be like them.’॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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