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mahabharat 5.95.7: राजा! इतने महान गुणों से युक्त और उच्च प्रतिष्ठित कुल से संबंधित होने पर भी यदि आपके कारण कोई अनुचित कार्य हो जाए तो वह उचित नहीं है।॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.95.7 
तस्मिन्नेवंविधे राजन् कुले महति तिष्ठति।
त्वन्निमित्तं विशेषेण नेह युक्तमसाम्प्रतम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
राजा! इतने महान गुणों से युक्त और उच्च प्रतिष्ठित कुल से संबंधित होने पर भी यदि आपके कारण कोई अनुचित कार्य हो जाए तो वह उचित नहीं है।॥7॥
 
King! Despite being of such great virtues and belonging to a highly respected family, if any inappropriate act is done due to you, then it is not right. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)