Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.95.60-61: भरत! मैं केवल आपके और पाण्डवों के कल्याण की कामना करता हूँ। हे राजन! समस्त प्रजा को धर्म, अर्थ और सुख से वंचित न करें। इस समय आप विपत्ति को ही धन और धन को ही विपत्ति समझ रहे हैं। (60-61) | mahabharat अध्याय 5.95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहं तु तव तेषां च श्रेय इच्छामि भारत॥ ६०॥
धर्मादर्थात् सुखाच्चैव मा राजन् नीनश: प्रजा:।
अनर्थमर्थं मन्वानोऽप्यर्थं चानर्थमात्मन:॥ ६१॥
अनुवाद
भरत! मैं केवल आपके और पाण्डवों के कल्याण की कामना करता हूँ। हे राजन! समस्त प्रजा को धर्म, अर्थ और सुख से वंचित न करें। इस समय आप विपत्ति को ही धन और धन को ही विपत्ति समझ रहे हैं। (60-61)
Bharata! I only wish for your welfare and that of the Pandavas. O King! Do not deprive all the subjects of Dharma, Artha and Sukhiya. At this time you are considering disaster as wealth and wealth as disaster for yourself. 60-61.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥