Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.95.49-50: जिस सभामें अधर्मसे बिंधित धर्म प्रवेश करता है और सभाके सदस्य अधर्मरूपी काँटेको काटकर नहीं निकालते, वहाँ सभाके सदस्य स्वयं उस काँटेसे बिंध जाते हैं (अर्थात् उन्हें स्वयं अधर्ममें प्रविष्ट होना पड़ता है)। जैसे नदी अपने किनारेके वृक्षोंको काटकर नष्ट कर देती है, वैसे ही अधर्मसे बिंधित धर्म उन सभाके सदस्योंको नष्ट कर देता है।॥49-50॥ | mahabharat अध्याय 5.95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
विद्धो धर्मो ह्यधर्मेण सभां यत्र प्रपद्यते॥ ४९॥
न चास्य शल्यं कृन्तन्ति विद्धास्तत्र सभासद:।
धर्म एतानारुजति यथा नद्यनुकूलजान्॥ ५०॥
अनुवाद
जिस सभामें अधर्मसे बिंधित धर्म प्रवेश करता है और सभाके सदस्य अधर्मरूपी काँटेको काटकर नहीं निकालते, वहाँ सभाके सदस्य स्वयं उस काँटेसे बिंध जाते हैं (अर्थात् उन्हें स्वयं अधर्ममें प्रविष्ट होना पड़ता है)। जैसे नदी अपने किनारेके वृक्षोंको काटकर नष्ट कर देती है, वैसे ही अधर्मसे बिंधित धर्म उन सभाके सदस्योंको नष्ट कर देता है।॥49-50॥
‘In the assembly where Dharma pierced by Adharma enters and the members of the assembly do not cut and remove the thorn of Adharma, there the members of the assembly themselves are pierced by that thorn (i.e. they themselves have to be involved in Adharma). Just as a river destroys the trees growing on its banks by felling them, in the same way that Dharma pierced by Adharma destroys those members of the assembly.’॥ 49-50॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥