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mahabharat 5.95.44-45h: आप धर्म और अर्थ के ज्ञाता हैं; अतः आप हमारी रक्षा कीजिए। आपकी महानता देखकर - आपको गुरु मानकर - हम चुपचाप अनेक कष्ट सहन करते रहे हैं (आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए); अब आप भी हमारे साथ माता-पिता के समान स्नेह से व्यवहार कीजिए॥ 44 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण  »  श्लोक 44-45h
 
 
श्लोक  5.95.44-45h 
त्वं धर्ममर्थं संजानन् सम्यङ्नस्त्रातुमर्हसि।
गुरुत्वं भवति प्रेक्ष्य बहून् क्लेशांस्तितिक्ष्महे॥ ४४॥
स भवान् मातृपितृवदस्मासु प्रतिपद्यताम्।
 
 
अनुवाद
आप धर्म और अर्थ के ज्ञाता हैं; अतः आप हमारी रक्षा कीजिए। आपकी महानता देखकर - आपको गुरु मानकर - हम चुपचाप अनेक कष्ट सहन करते रहे हैं (आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए); अब आप भी हमारे साथ माता-पिता के समान स्नेह से व्यवहार कीजिए॥ 44 1/2॥
 
‘You are the knower of Dharma and Artha; therefore please protect us. Seeing the greatness in you – thinking that you are our Guru, we have been silently bearing many troubles (to obey your orders); now please also treat us with affection like our parents.॥ 44 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)