Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.95.36: हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भरतवंश के आभूषणों! इन राजाओं को उत्तम वस्त्र और सुन्दर हार धारण करने चाहिए, अपने मन से द्वेष और द्वेष को दूर कर देना चाहिए और यहाँ से सम्मानपूर्वक प्रस्थान करना चाहिए ॥ 36॥ | mahabharat अध्याय 5.95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुवासस: स्रग्विणश्च सत्कृता भरतर्षभ।
अमर्षं च निराकृत्य वैराणि च परंतप॥ ३६॥
अनुवाद
हे शत्रुओं को पीड़ा देने वाले भरतवंश के आभूषणों! इन राजाओं को उत्तम वस्त्र और सुन्दर हार धारण करने चाहिए, अपने मन से द्वेष और द्वेष को दूर कर देना चाहिए और यहाँ से सम्मानपूर्वक प्रस्थान करना चाहिए ॥ 36॥
O ornaments of the Bharata clan, who torment the enemies! These kings should wear fine clothes and beautiful necklaces, remove resentment and hatred from their minds and depart from here with honour. ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥