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mahabharat 5.95.24: इस प्रकार तुम अपने पुत्रों, पौत्रों, पिता, भाइयों और मित्रों द्वारा पूर्णतः सुरक्षित होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकोगे ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 5.95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.95.24 
स त्वं पुत्रैश्च पौत्रैश्च पितृभिर्भ्रातृभिस्तथा।
सुहृद्भि: सर्वतो गुप्त: सुखं शक्ष्यसि जीवितुम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार तुम अपने पुत्रों, पौत्रों, पिता, भाइयों और मित्रों द्वारा पूर्णतः सुरक्षित होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत कर सकोगे ॥24॥
 
In this way, you will be able to live a happy life, completely protected by your sons, grandsons, father, brothers and friends. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)