Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.95.12: भरत! यदि तुम चाहो तो यह भयंकर विपत्ति अभी भी टल सकती है। हे भरतश्रेष्ठ! मैं इन दोनों पक्षों में शांति स्थापित करना कोई कठिन कार्य नहीं समझता॥12॥ | mahabharat अध्याय 5.95: कौरवसभामें श्रीकृष्णका प्रभावशाली भाषण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शक्या चेयं शमयितुं त्वं चेदिच्छसि भारत।
न दुष्करो ह्यत्र शमो मतो मे भरतर्षभ॥ १२॥
अनुवाद
भरत! यदि तुम चाहो तो यह भयंकर विपत्ति अभी भी टल सकती है। हे भरतश्रेष्ठ! मैं इन दोनों पक्षों में शांति स्थापित करना कोई कठिन कार्य नहीं समझता॥12॥
Bharata! If you wish, this dreadful calamity can still be averted. O best of Bharatas! I do not consider it a difficult task to establish peace between these two sides.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥