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mahabharat 5.94.d4: सर्पों के शत्रु विनतानन्दन गरुड़ भगवान श्रीकृष्ण के रथ में लगे हुए ध्वजदण्ड पर सत्वगुण स्वरूप सूर्य को स्पर्श करते हुए बैठे थे।   |   mahabharat अध्याय 5.94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  5.94.d4 
वैनतेय: स्थितस्तस्यां प्रभाकरमिव स्पृशन्।
तस्य सत्त्ववत: केतौ भुजगारिरशोभत॥
 
 
अनुवाद
सर्पों के शत्रु विनतानन्दन गरुड़ भगवान श्रीकृष्ण के रथ में लगे हुए ध्वजदण्ड पर सत्वगुण स्वरूप सूर्य को स्पर्श करते हुए बैठे थे।
 
Vintanandan Garuda, the enemy of snakes, was sitting on the banner of the flagpole attached to the chariot of Lord Shri Krishna as the embodiment of Sattva Guna, touching the sun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)