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mahabharat 5.94.7-9: उसी समय संध्यावंदन में लगे हुए राजा दुर्योधन और सुबलपुत्र शकुनि भी दशार्हनन्दन अपराजित योद्धा श्रीकृष्ण के पास आये और उनसे इस प्रकार बोले - 'गोविन्द! महाराज धृतराष्ट्र सभा में आये हैं। भीष्म आदि कौरव तथा अन्य सभी भूपाल भी वहाँ उपस्थित हैं। जैसे स्वर्ग में देवता इन्द्र का आवाहन करते हैं, वैसे ही भीष्म आदि सभी लोग आपसे वहाँ प्रकट होने का अनुरोध करते हैं।' यह सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने मधुर सान्त्वनापूर्ण वचनों से उन दोनों का सत्कार किया।   |   mahabharat अध्याय 5.94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण  »  श्लोक 7-9
 
 
श्लोक  5.94.7-9 
अथ दुर्योधन: कृष्णं शकुनिश्चापि सौबल:।
संध्यां तिष्ठन्तमभ्येत्य दाशार्हमपराजितम्॥ ७॥
आचक्षेतां तु कृष्णस्य धृतराष्ट्रं सभागतम्।
कुरूंश्च भीष्मप्रमुखान् राज्ञ: सर्वांश्च पार्थिवान्॥ ८॥
त्वामर्थयन्ते गोविन्द दिवि शक्रमिवामरा:।
तावभ्यनन्दद् गोविन्द: साम्ना परमवल्गुना॥ ९॥
 
 
अनुवाद
उसी समय संध्यावंदन में लगे हुए राजा दुर्योधन और सुबलपुत्र शकुनि भी दशार्हनन्दन अपराजित योद्धा श्रीकृष्ण के पास आये और उनसे इस प्रकार बोले - 'गोविन्द! महाराज धृतराष्ट्र सभा में आये हैं। भीष्म आदि कौरव तथा अन्य सभी भूपाल भी वहाँ उपस्थित हैं। जैसे स्वर्ग में देवता इन्द्र का आवाहन करते हैं, वैसे ही भीष्म आदि सभी लोग आपसे वहाँ प्रकट होने का अनुरोध करते हैं।' यह सुनकर भगवान श्रीकृष्ण ने मधुर सान्त्वनापूर्ण वचनों से उन दोनों का सत्कार किया।
 
At the same time, King Duryodhan and Subala's son Shakuni, who were engaged in evening worship, also came to Dasharhanandan, the undefeated warrior Shri Krishna and spoke to him like this - 'Govind! Maharaj Dhritarashtra has come to the meeting. Bhishma, etc. Kauravas and all other Bhupals are also present there. Just as the gods in heaven appeal to Indra, similarly everyone like Bhishma requests you to appear there.' Hearing this, Lord Shri Krishna greeted both of them with sweet consoling words. 7-9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)