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mahabharat 5.94.54: उस समय सबका मन भगवान गोविंद में लगा हुआ था। इसलिए सब लोग चुपचाप बैठे थे। कोई कुछ नहीं बोल रहा था।   |   mahabharat अध्याय 5.94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  5.94.54 
ततस्तूष्णीं सर्वमासीद् गोविन्दगतमानसम्।
न तत्र कश्चित् किञ्चिद् वा व्याजहार पुमान् क्वचित्॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
उस समय सबका मन भगवान गोविंद में लगा हुआ था। इसलिए सब लोग चुपचाप बैठे थे। कोई कुछ नहीं बोल रहा था।
 
At that time everybody's mind was focused on Lord Govind. Therefore everyone was sitting quietly. No one was speaking anything.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि भगवद्यानपर्वणि श्रीकृष्णसभाप्रवेशे चतुर्नवतितमोऽध्याय:॥ ९४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत भगवद्यानपर्वमें श्रीकृष्णका सभामें प्रवेशविषयक चौरानबेवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ९४॥

[दाक्षिणात्य अधिक पाठके १० १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६४ १/२ श्लोक हैं।]
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)