श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  5.94.45-46h 
आसनान्यथ मृष्टानि महान्ति विपुलानि च॥ ४५॥
मणिकाञ्चनचित्राणि समाजह्रुस्ततस्तत:।
 
 
अनुवाद
तब सेवकों ने इधर-उधर से रत्नजटित शुद्ध, बड़े और विशाल आसन लाकर वहाँ रख दिए।
 
Then the servants brought from here and there pure, large and spacious seats studded with gems and gold and placed them there. 45 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)