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mahabharat 5.94.41-42: शत्रु नगरी को जीतने वाले परंतप श्रीकृष्ण ने राजाओं के बीच खड़े होकर देखा कि आकाश में कुछ ऋषिगण खड़े हैं। नारद आदि महामुनियों को देखकर श्रीकृष्ण ने शान्तनुनन्दन भीष्म से धीरे से कहा - 'नरेश्वर! ऋषिगण इस राजसभा को देखने आये हैं।' 41-42॥   |   mahabharat अध्याय 5.94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान‍् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  5.94.41-42 
तत्र तिष्ठन् स दाशार्हो राजमध्ये परंतप:।
अपश्यदन्तरिक्षस्थानृषीन् परपुरंजय:।
ततस्तानभिसम्प्रेक्ष्य नारदप्रमुखानृषीन्॥ ४१॥
अभ्यभाषत दाशार्हो भीष्मं शान्तनवं शनै:।
पार्थिवीं समितिं द्रष्टुमृषयोऽभ्यागता नृप॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
शत्रु नगरी को जीतने वाले परंतप श्रीकृष्ण ने राजाओं के बीच खड़े होकर देखा कि आकाश में कुछ ऋषिगण खड़े हैं। नारद आदि महामुनियों को देखकर श्रीकृष्ण ने शान्तनुनन्दन भीष्म से धीरे से कहा - 'नरेश्वर! ऋषिगण इस राजसभा को देखने आये हैं।' 41-42॥
 
Standing among the kings, Parantap Shri Krishna, the conqueror of the enemy city, saw that some sages were standing in the sky. Seeing those great sages like Narad and others, Shri Krishna softly said to Shantanunandan Bhishma - 'Nareshwar! The sages have come to see this royal assembly. 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)