Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.94.33: राजन! जैसे सूर्य अपने तेज से आकाश के तारों को लुप्त कर देता है, उसी प्रकार तेजस्वी भगवान श्रीकृष्ण अपने दिव्य तेज से कौरवों को आवृत करते हुए विदुर और सात्यकि का हाथ पकड़कर सभा में आये॥33॥ | mahabharat अध्याय 5.94: दुर्योधन एवं शकुनिके द्वारा बुलाये जानेपर भगवान् श्रीकृष्णका रथपर बैठकर प्रस्थान एवं कौरवसभामें प्रवेश और स्वागतके पश्चात् आसनग्रहण । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! जैसे सूर्य अपने तेज से आकाश के तारों को लुप्त कर देता है, उसी प्रकार तेजस्वी भगवान श्रीकृष्ण अपने दिव्य तेज से कौरवों को आवृत करते हुए विदुर और सात्यकि का हाथ पकड़कर सभा में आये॥33॥
Rajan! Just as the sun makes the stars of the sky disappear with its radiance, similarly the glorious Lord Shri Krishna, covering the Kauravas with his divine radiance, came to the assembly holding the hands of Vidur and Satyaki. 33॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥