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mahabharat 5.93.20: शांति के लिए, मैं अहिंसापूर्वक, धर्म और अर्थ के अनुसार, विद्वानों द्वारा अनुमोदित वचन बोलूँगा। यदि धृतराष्ट्र के पुत्र मेरी बातों पर ध्यान देंगे, तो वे उन्हें अवश्य स्वीकार करेंगे और कौरव भी यह जानकर मेरा सम्मान करेंगे कि मैं यहाँ शांति स्थापित करने आया हूँ।   |   mahabharat अध्याय 5.93: श्रीकृष्णका कौरव-पाण्डवोंमें संधिस्थापनके प्रयत्नका औचित्य बताना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 93: श्रीकृष्णका कौरव-पाण्डवोंमें संधिस्थापनके प्रयत्नका औचित्य बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.93.20 
अपि वाचं भाषमाणस्य काव्यां
धर्मारामामर्थवतीमहिंस्राम्।
अवेक्षेरन् धार्तराष्ट्रा: शमार्थं
मां च प्राप्तं कुरव: पूजयेयु:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
शांति के लिए, मैं अहिंसापूर्वक, धर्म और अर्थ के अनुसार, विद्वानों द्वारा अनुमोदित वचन बोलूँगा। यदि धृतराष्ट्र के पुत्र मेरी बातों पर ध्यान देंगे, तो वे उन्हें अवश्य स्वीकार करेंगे और कौरव भी यह जानकर मेरा सम्मान करेंगे कि मैं यहाँ शांति स्थापित करने आया हूँ।
 
For peace, I will speak non-violently, in accordance with Dharma and Artha, as approved by learned men. If Dhritarashtra's sons pay attention to my words, they will certainly accept them and the Kauravas will also respect me, knowing that I have come here to establish peace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)